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आरोपियों की चाल पर लगाम: दो बार के बाद पेशी टालने पर होगी कानूनी आपत्ति

दुर्ग। नए आपराधिक कानूनों के तहत अदालतों में आरोपियों द्वारा बार-बार पेशी टालने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की दिशा में प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में बुधवार को दुर्ग रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग (भा.पु.से.) की अध्यक्षता में अभियोजन अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें दोषमुक्ति के बढ़ते मामलों की समीक्षा की गई।

बैठक में तय किया गया कि यदि कोई आरोपी दो बार से अधिक पेशी टालने या अनुपस्थित रहने का प्रयास करता है, तो पब्लिक प्रोसिक्यूटर अदालत में औपचारिक आपत्ति दर्ज करेंगे। यह कदम न्याय प्रक्रिया को तेज करने और अपराधियों को कानून के दायरे में लाने के लिए उठाया गया है।

बैठक में अभियोजन पक्ष ने दोषमुक्ति के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डाला। इसमें प्रमुख रूप से पुलिस द्वारा विवेचना में लापरवाही, तथ्यान्वेषण में त्रुटियाँ, साक्ष्य संकलन की कमजोरियाँ और गवाहों के पक्षद्रोही हो जाने की समस्याएं सामने आईं।

IG गर्ग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विवेचक अधिकारी पीड़ितों एवं गवाहों से लगातार संवाद बनाए रखें। उन्होंने कहा कि गवाहों को उनके पूर्व कथनों पर दृढ़ रहने हेतु प्रेरित किया जाए, जिससे वे न्यायालय में निर्भीक एवं स्वतंत्र रूप से बयान दे सकें। इससे अभियुक्तों के विरुद्ध प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नवीन आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत अब अभियोजन अधिकारी बार-बार पेशी टालने वाले आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आपत्ति प्रस्तुत करेंगे। यह रणनीति प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के उद्देश्य से बनाई गई है।

इस महत्वपूर्ण बैठक में संयुक्त संचालक अभियोजन दुर्ग एस.एस. ध्रुव, उप संचालक दुर्ग अनुरेखा सिंह, बालोद के उप संचालक प्रेमेंद्र बैसवाड़े, बेमेतरा की उप संचालक कंचन पाटिल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्ग पद्मश्री तंवर, बालोद के एएसपी अशोक जोशी, डीएसपी शिल्पा साहू, कौशल्या साहू, उप निरीक्षक राजकुमार प्रधान, डाटा एंट्री ऑपरेटर तेजस्वी गौतम एवं पुलिस पी.आर.ओ. प्रशांत कुमार शुक्ला उपस्थित रहे।

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